देहरादून। मिठाइयों के त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ रही है, वहीं मिठाई में मिलावट का खतरा भी गहराता जा रहा है। इसी बीच राजधानी...
देहरादून। मिठाइयों के त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ रही है, वहीं मिठाई में मिलावट का खतरा भी गहराता जा रहा है। इसी बीच राजधानी देहरादून में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 5 हजार किलो नकली रसगुल्ला बरामद किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह मिठाई पहले ही शहर के कई दुकानदारों को सप्लाई की जा चुकी थी।
रेड की जानकारी कैसे मिली
खाद्य सुरक्षा विभाग को पिछले कुछ दिनों से यह शिकायतें मिल रही थीं कि शहर में सप्लाई हो रही कुछ मिठाइयों की गुणवत्ता संदिग्ध है। विभाग ने एक विशेष टीम गठित की और गुरुवार देर रात प्रेमनगर क्षेत्र की एक मिठाई फैक्ट्री पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान टीम को संदिग्ध रसायनों से बने रसगुल्ले के डिब्बे मिले। प्राथमिक जांच में यह पाया गया कि मिठाई बनाने में इस्तेमाल किए गए पदार्थ मानक गुणवत्ता के नहीं थे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. अनिल शर्मा ने बताया,
“हमारी टीम ने मौके से लगभग 5,000 किलो रसगुल्ले जब्त किए हैं। मिठाई में प्रयोग किया गया मावा और चाशनी रासायनिक तत्वों से युक्त पाई गई है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है।”
कई दुकानदारों तक पहुँच चुकी थी सप्लाई
जांच में सामने आया कि यह मिठाई देहरादून के साथ-साथ ऋषिकेश और हरिद्वार के कुछ थोक विक्रेताओं को भी सप्लाई की जा चुकी थी।
विभाग अब उन दुकानों की सूची तैयार कर रहा है जहाँ यह रसगुल्ला पहले ही पहुँच चुका है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित दुकानदार तत्काल इस मिठाई को बिक्री से हटा दें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली या मिलावटी मिठाईयों का सेवन गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। मैक्स हॉस्पिटल देहरादून के डॉ. राकेश कोहली ने चेतावनी दी,
“मिलावटी रसगुल्लों में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व लीवर, किडनी और पाचन तंत्र पर बुरा असर डालते हैं। ऐसे उत्पादों का सेवन बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।”
त्योहारों में बढ़ती मिलावट की चुनौती
त्योहारी मौसम में मिठाई की मांग बढ़ने के साथ मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। कम लागत में अधिक उत्पादन की होड़ में कुछ असामाजिक तत्व मिठाई में सिंथेटिक दूध, कृत्रिम रंग, और रासायनिक चाशनी का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकते।
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में त्योहारी सीजन के दौरान मिठाइयों में मिलावट के 40 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
देहरादून के जिलाधिकारी सोनिका ने कहा, “किसी भी व्यक्ति या व्यापारी को मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाने या बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आम जनता से भी अपील है कि संदिग्ध मिठाइयों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।”
जनता के लिए सावधानी और जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए। मिठाई खरीदते समय ब्रांड, तिथि और गंध पर ध्यान देना चाहिए। सस्ते दामों या आकर्षक पैकेजिंग के झांसे में आकर गुणवत्ता से समझौता न करें।
निष्कर्ष: मिठास में मिलावट पर सख्ती ही समाधान
देहरादून में 5 हजार किलो नकली रसगुल्ला बरामद होने की यह घटना केवल एक शहर की नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि त्योहारों की भागदौड़ में हम खाद्य सुरक्षा के प्रति कितने लापरवाह हो गए हैं। अगर उपभोक्ता जागरूक और प्रशासन सतर्क रहेगा, तभी त्योहारों की असली मिठास बरकरार रह सकेगी।